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कुंडली मिलान
कुण्डली (जिसे जन्म-कुण्डली, जनम कुंडली, जन्म पत्रिका, जन्मपत्री, वैदिक कुण्डली, हिन्दू कुण्डली आदि नामों....
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आपका व्यवसाय
जब आप अपने भविष्य के विषय में निर्णय लेते हैं उस समय अक्सर मन में सवाल उठता है कि ...
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आपका व्यवसाय
 
जब आप अपने भविष्य के विषय में निर्णय लेते हैं उस समय अक्सर मन में सवाल उठता है कि व्यापार करना चाहिए अथवा नौकरी. ज्योतिष विधान के अनुसार अगर कुण्डली में द्वितीय, पंचम, नवम, दशम और एकादश भाव और उन में स्थित ग्रह कमजोर हैं तो आपको नौकरी करनी पड़ सकती है. इन भावों में अगर ग्रह मजबबूत हैं तो आप व्यापार सकते हें.

कुण्डली में आर्थिक स्थिति का आंकलन द्वितीय भाव से किया जाता है. आप किस क्षेत्र में कामयाब होंगे इसकी जानकारी एकादश भाव से किया जाता है. इस भाव से यह भी संकेत मिलता है कि आपको साझेदारी में कामयाबी मिलेगी अथवा नहीं.

कुण्डली का चतुर्थ भाव पैतृक सम्पत्ति से आय का योग बनता है. कुण्डली का पंचम भाव अचानक धन लाभ दिलाने वाला है. इस भाव के ग्रहों की स्थिति उच्च होने से लौटरी से धन मिलने की संभावना प्रबल रहती है. सप्तम भाव से गठबंधन और व्यापार में साझेदारी की स्थिति का भी ज्ञान होता है. इस भाव से ही यह जानकारी मिलती है कि आपको ससुराल पक्ष से कितना लाभ मिलता है.

अष्टम भाव यूं तो मारक स्थान के रूप में विशेष रूप से जाना जाता है परंतु इस भाव से आय की स्थिति का भी ज्ञान होता है. आकस्मिक लाभ, सट्टेबाजी से लाभ, किसी स्त्री से लाभ के संदर्भ में यह भाव संकेत देता है. नवम भाव भाग्य स्थान होता है जिससे भाग्य फल की जानकारी मिलती है. दशम भाव को कर्म का घर कहा गया है यह रोजगार एव व्यवसायिक स्थिति के विषय में बताता है. इस भाव से ही यह संकेत मिलता है कि आपको सरकारी पक्ष से लाभ मिलेगा. द्वादश भाव व्यय यानी खर्चे का घर होता है. इस भाव से यह ज्ञान होता है कि आय के साथ व्यय का तालमेल कैसा है.

कुण्डली के दशम भाव में चन्द्रमा सूर्य होने पर पिता अथवा पैतृक सम्पत्ति से लाभ मिलता है. इस सूर्य की स्थिति से यह भी पता चलता है कि आप पैतृक कार्य करेंगे अथवा नहीं. चन्द्रमा अगर इस भाव में हो तो माता एवं मातृ पक्ष से लाभ की संभावना बनती है. चन्द्रमा से सम्बन्धित क्षेत्र में कामयाबी की प्रबल संभावना रहती है. मंगल की उपस्थिति दशम भाव में होने पर विरोधी पक्ष से लाभ मिलता है.
 
 
 
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